The Essence of the Tantra· 10.13 / 18

The Essence of the Tantra10.13

10.13

करणत्वं द्विधा शुद्धं कर्तृतास्पर्शि च इति दश

Transliteration (IAST)

karaṇatvaṃ dvidhā śuddhaṃ kartṛtāsparśi ca iti daśa

— करणता — करण (साधन) होने की दशा ; — दो प्रकार की ; — शुद्ध (करणता) ; — कर्तृता-स्पर्शी — कर्तृत्व से स्पृष्ट ; — दस

करणता दो प्रकार की है — शुद्ध एवं कर्तृता-स्पर्शी — अतः (और) दस।