— स्वरूप के आवरण (आच्छादन) में (अधिकरण कारक — समासगत); — और (अव्यय); — उस (शिव या पशु) का — पु.षष्ठी एक.; — शक्तियाँ (कर्ता कारक बहुवचन, स्त्रीलिङ्ग); — सतत-उत्थित — निरन्तर उठती हुई (कर्ता कारक बहुवचन — समासगत); — क्योंकि, जिससे (हेत्वर्थक सम्बन्धवाचक अव्यय); — शब्द के अनुवेध (वेधन) से (करण कारक — समासगत); — नहीं (अव्यय, निषेधार्थक); — बिना, रहित (अव्यय); — प्रत्यय का उद्भव — विचार का उठना (कर्ता कारक — समासगत)
उसके स्वरूप के आवरण (आच्छादन) में ये शक्तियाँ निरन्तर उठती रहती हैं; क्योंकि शब्द के अनुवेध (वेधन) के बिना प्रत्यय (विचार) का उद्भव नहीं होता।