The Vision of Śiva· 7.88 / 122

The Vision of Śiva7.88

7.88
प्रतिपत्त्यानया स्नानं निर्मलीकरणं मतम् । दुःखे वापि सुखे वापि सर्वासु प्रतिपत्तिषु ॥८८॥
pratipattyānayā snānaṃ nirmalīkaraṇaṃ matam | duḥkhe vāpi sukhe vāpi sarvāsu pratipattiṣu
— इस प्रतिपत्ति के द्वारा ; — स्नान ; — निर्मलीकरण (शुद्धि) ; — माना गया ; — दु:ख में भी ; — सुख में भी ; — समस्त प्रतीतियों में

इस प्रतिपत्ति (निश्चय) के द्वारा स्नान निर्मलीकरण (शुद्धि-संपादन) माना गया है — चाहे दु:ख में हो अथवा सुख में, समस्त प्रतीतियों (अनुभूतियों) में (समानरूप से)।