The Vision of Śiva· 7.89 / 122

The Vision of Śiva7.89

7.89
शिवोऽस्मीतिमनोह्लादो जलस्नानं परं मतम् । चिन्निर्मला तन्मयं हि जगदस्मि तथाविधः ॥८९॥
śivo'smītimanohlādo jalasnānaṃ paraṃ matam | cinnirmalā tanmayaṃ hi jagadasmi tathāvidhaḥ
— 'मैं शिव हूँ' ; — इस मनोह्लाद को ; — जल-स्नान ; — परम माना गया ; — चित् निर्मल ; — उसी से बना निश्चय ही ; — जगत् ; — मैं हूँ ; — वैसे ही प्रकार का

'मैं शिव हूँ' इस मनोह्लाद (मानसिक आनन्द) को परम जल-स्नान माना गया है; चित् निर्मल (निष्कलंक) है, यह जगत् निश्चय ही उसी से बना है, (और) मैं भी वैसे ही प्रकार का हूँ।