The Vision of Śiva· 7.90 / 122

The Vision of Śiva7.90

7.90
इत्यास्थाजलशौचेन शुद्धिस्नानं तथोदितम् । सर्वभावाः शिवाकारा अन्तर्भूताः शिवानले ॥९०॥
ityāsthājalaśaucena śuddhisnānaṃ tathoditam | sarvabhāvāḥ śivākārā antarbhūtāḥ śivānale
— इस प्रकार आस्था (दृढ़ निश्चय) रूप जल के शौच के द्वारा ; — शुद्धि-स्नान ; — इस प्रकार कहा गया ; — समस्त भाव ; — शिव-आकार वाले ; — अन्तर्भूत (विलीन) ; — शिवरूप अनल (अग्नि) में

इस प्रकार आस्था (दृढ़ निश्चय) रूप जल के शौच (शुद्धि) के द्वारा शुद्धि-स्नान इस प्रकार कहा गया; समस्त भाव, शिव-आकार वाले होकर, शिवरूप अनल (अग्नि) में अन्तर्भूत (विलीन) हो जाते हैं।