The Vision of Śiva· 7.83 / 122

The Vision of Śiva7.83

7.83
तथापि कोशहेमादिसादृश्यं योगसत्यता । शिवोऽस्मीति मदिच्छातः सर्वभावप्रवर्तनम् ॥८३॥
tathāpi kośahemādisādṛśyaṃ yogasatyatā | śivo'smīti madicchātaḥ sarvabhāvapravartanam
— तथापि ; — कोश (कसौटी) में स्वर्ण आदि के सादृश्य (परीक्षा) के समान ; — योग की सत्यता ; — 'मैं शिव हूँ' ; — इस प्रकार ; — मेरी इच्छा से ; — समस्त भावों का प्रवर्तन

तथापि योग की सत्यता (का परीक्षण) कोश (कसौटी-पात्र) में स्वर्ण आदि के सादृश्य (परीक्षा) के समान है: 'मैं शिव हूँ' इस (निश्चय से), मेरी इच्छा से ही समस्त भावों का प्रवर्तन (होता) है।