भावितेऽभाविते वापि शिवत्वे शिवतैव मे ।
सर्वदा पितृमात्रादितौल्यदार्ढ्येन योगिता ॥८२॥
bhāvite'bhāvite vāpi śivatve śivataiva me |
sarvadā pitṛmātrāditaulyadārḍhyena yogitā
(मेरा) शिवत्व भावित (ध्यान में लाया गया) हो अथवा अभावित (न लाया गया) हो, मेरी शिवता ही (है), सदा; (और उससे) योगिता (योग) पिता, माता आदि के (निश्चय के) तुल्य (समान) दृढ़ता के साथ (रहती है)।