The Vision of Śiva· 7.82 / 122

The Vision of Śiva7.82

7.82
भावितेऽभाविते वापि शिवत्वे शिवतैव मे । सर्वदा पितृमात्रादितौल्यदार्ढ्येन योगिता ॥८२॥
bhāvite'bhāvite vāpi śivatve śivataiva me | sarvadā pitṛmātrāditaulyadārḍhyena yogitā
— भावित (ध्यान में लाया गया) ; — अथवा अभावित ; — (मेरा) शिवत्व ; — मेरी शिवता ही ; — सदा ; — पिता, माता आदि के (निश्चय के) तुल्य दृढ़ता के साथ ; — योगिता (योग)

(मेरा) शिवत्व भावित (ध्यान में लाया गया) हो अथवा अभावित (न लाया गया) हो, मेरी शिवता ही (है), सदा; (और उससे) योगिता (योग) पिता, माता आदि के (निश्चय के) तुल्य (समान) दृढ़ता के साथ (रहती है)।