करोमि स्म प्रकरणं शिवदृष्ट्यभिधानकम् ।
एवमेषां त्र्यम्बकाख्या तेरम्बा देशभाषया ॥१२१॥
karomi sma prakaraṇaṃ śivadṛṣṭyabhidhānakam |
evameṣāṃ tryambakākhyā terambā deśabhāṣayā
मैंने शिवदृष्टि नामक (इस) प्रकरण (ग्रन्थ) की रचना की। इस प्रकार इन (परम्परा-धारकों) की 'त्र्यम्बक' संज्ञा देश-भाषा (स्थानीय बोली) में 'तेरम्ब' (कहलाती है) —