स्थिता शिष्यप्रशिष्याद्यैर्विस्तीर्णा मठिकोदिता ।
तदेवमेतद्विहितं मया प्रकरणं मनाक् ॥१२२॥
sthitā śiṣyapraśiṣyādyairvistīrṇā maṭhikoditā |
tadevametadvihitaṃ mayā prakaraṇaṃ manāk
— (वह त्र्यम्बक) मठिका (परम्परा-मठ इस नाम से) उदित (विख्यात), शिष्यों, प्रशिष्यों आदि के द्वारा स्थापित तथा विस्तीर्ण (विस्तृत) (है)। इस प्रकार यह प्रकरण मेरे द्वारा संक्षेप में रचा गया।