The Vision of Śiva· 7.122 / 122

The Vision of Śiva7.122

7.122
स्थिता शिष्यप्रशिष्याद्यैर्विस्तीर्णा मठिकोदिता । तदेवमेतद्विहितं मया प्रकरणं मनाक् ॥१२२॥
sthitā śiṣyapraśiṣyādyairvistīrṇā maṭhikoditā | tadevametadvihitaṃ mayā prakaraṇaṃ manāk
— स्थापित ; — शिष्यों, प्रशिष्यों आदि के द्वारा ; — विस्तीर्ण (विस्तृत) ; — (त्र्यम्बक नामक) मठिका (परम्परा-मठ) उदित (विख्यात) ; — इस प्रकार ; — यह रचा गया ; — मेरे द्वारा ; — प्रकरण ; — संक्षेप में

— (वह त्र्यम्बक) मठिका (परम्परा-मठ इस नाम से) उदित (विख्यात), शिष्यों, प्रशिष्यों आदि के द्वारा स्थापित तथा विस्तीर्ण (विस्तृत) (है)। इस प्रकार यह प्रकरण मेरे द्वारा संक्षेप में रचा गया।