The Vision of Śiva· 5.77 / 110

The Vision of Śiva5.77

5.77
व्यापकत्वाच्छिवत्वस्य सर्वज्ञत्वाद्भवेदथ । तस्मादेतच्च संज्ञेयं सर्वः स्वात्मानमात्मना ॥७७॥
vyāpakatvācchivatvasya sarvajñatvādbhavedatha | tasmādetacca saṃjñeyaṃ sarvaḥ svātmānamātmanā
— व्यापकत्व के कारण ; — शिवत्व के ; — सर्वज्ञत्व के कारण ; — होगा ; — फिर ; — इसलिए ; — और यह ; — संज्ञेय (जानने योग्य) ; — सब (वस्तु) ; — अपने आत्मा को ; — अपने (आत्मा) से

शिवत्व के व्यापकत्व के कारण, और (उसके) सर्वज्ञत्व के कारण, (यह सब) होगा; इसलिए यह भी संज्ञेय (जानने योग्य) है कि सब (वस्तु) अपने ही आत्मा को अपने (आत्मा) से (जानती है)।