The Vision of Śiva· 5.69 / 110

The Vision of Śiva5.69

5.69
यैरुक्तं सिद्धसाध्यत्वं सामान्ये तन्न दूषणम् । अत्रेति तत्प्रयोगत्वाद्दिग्देशाद्यैर्विशेषिता ॥६९॥
yairuktaṃ siddhasādhyatvaṃ sāmānye tanna dūṣaṇam | atreti tatprayogatvāddigdeśādyairviśeṣitā
— जिनके द्वारा ; — कहा गया ; — सिद्धसाध्यत्व ; — सामान्य के विषय में ; — वह दूषण नहीं ; — यहाँ ; — ऐसा ; — उसके अनुप्रयोग के कारण ; — दिशा, देश आदि से ; — विशेषित

जिन्होंने (हमारे विरुद्ध) कहा कि 'सामान्य के विषय में यह सिद्धसाध्यत्व (पहले से सिद्ध को सिद्ध करने का दोष) है' — वह यहाँ दूषण नहीं; क्योंकि उस (अनुमान) का अनुप्रयोग दिशा, देश आदि से विशेषित (होकर ही होता है, और हमारी आलोचना उसी पर है)।