शब्दादेर्ग्रहणं नास्ति पूर्वापरसहोदितैः ॥६४॥
śabdādergrahaṇaṃ nāsti pūrvāparasahoditaiḥ
(अन्यथा) पूर्व, अपर और साथ-साथ उठने वाले (वर्णों) के द्वारा शब्द आदि का ग्रहण नहीं (बन सकता — केवल चित् की एकीकरणकारी शक्ति ही क्रम को एक में बाँधती है)।
(अन्यथा) पूर्व, अपर और साथ-साथ उठने वाले (वर्णों) के द्वारा शब्द आदि का ग्रहण नहीं (बन सकता — केवल चित् की एकीकरणकारी शक्ति ही क्रम को एक में बाँधती है)।