The Vision of Śiva· 4.64 / 124

The Vision of Śiva4.64

4.64
शब्दादेर्ग्रहणं नास्ति पूर्वापरसहोदितैः ॥६४॥
śabdādergrahaṇaṃ nāsti pūrvāparasahoditaiḥ
— शब्द आदि का ; — ग्रहण ; — नहीं है ; — पूर्व-अपर-साथ उठने वालों के द्वारा

(अन्यथा) पूर्व, अपर और साथ-साथ उठने वाले (वर्णों) के द्वारा शब्द आदि का ग्रहण नहीं (बन सकता — केवल चित् की एकीकरणकारी शक्ति ही क्रम को एक में बाँधती है)।