The Vision of Śiva· 4.61 / 124

The Vision of Śiva4.61

4.61
व्यतिरेकोऽवयविनस्तदेवेदं विचार्यताम् । भिन्नेष्वैक्यमभेदश्च यथा तत्र व्यवस्थितम् ॥६१॥
vyatireko'vayavinastadevedaṃ vicāryatām | bhinneṣvaikyamabhedaśca yathā tatra vyavasthitam
— व्यतिरेक ; — अवयवी का ; — यही ; — विचारणीय ; — भिन्न (अवयवों) में ; — एकता ; — और अभेद ; — जैसे ; — वहाँ ; — व्यवस्थित

(क्या) अवयवी का (अवयवों से) व्यतिरेक (है) — यही विचारणीय है: भिन्न (अवयवों) में एकता और अभेद वहाँ जैसे व्यवस्थित है (वही मूल प्रश्न है)।