The Vision of Śiva4.62
तथा तत्र परिज्ञेयं पत्युः सामर्थ्यमीदृशम् ।
अभिन्ने भेदता येन भिन्नेष्वप्यस्त्यभेदता ॥६२॥
tathā tatra parijñeyaṃ patyuḥ sāmarthyamīdṛśam |
abhinne bhedatā yena bhinneṣvapyastyabhedatā
— उसी प्रकार ; — उसमें ; — जानने योग्य ; — पति (शिव) का ; — सामर्थ्य ; — ऐसा ; — अभिन्न में ; — भेदता ; — जिससे ; — भिन्नों में भी ; — है ; — अभेदता उसी प्रकार उसमें पति (शिव) का सामर्थ्य ऐसा जानने योग्य है — जिससे अभिन्न में भेदता, और भिन्नों में भी अभेदता है।