The Vision of Śiva· 4.60 / 124

The Vision of Śiva4.60

4.60
इतश्च सर्वशिवतावयवेभ्यो न कुत्रचित् ॥६०॥
itaśca sarvaśivatāvayavebhyo na kutracit
— और इससे ; — सबकी शिवता ; — अवयवों से ; — कहीं नहीं (पृथक् अवयवी)

और इस (विचार) से सबकी शिवता (सिद्ध होती है): अवयवों से (पृथक् कोई वस्तुतः भिन्न अवयवी) कहीं नहीं (मिलता)।