१दीपेन क्रियते व्यक्तिर्घटादेः सत एव वा ॥४२॥
1dīpena kriyate vyaktirghaṭādeḥ sata eva vā
(आक्षेप:) अथवा घट आदि की व्यक्ति दीप से की जाती है — किन्तु जो पहले से सत् है उसी की (दीप केवल प्रकट करता है, बनाता नहीं)।
(आक्षेप:) अथवा घट आदि की व्यक्ति दीप से की जाती है — किन्तु जो पहले से सत् है उसी की (दीप केवल प्रकट करता है, बनाता नहीं)।