The Vision of Śiva· 4.42 / 124

The Vision of Śiva4.42

4.42
१दीपेन क्रियते व्यक्तिर्घटादेः सत एव वा ॥४२॥
1dīpena kriyate vyaktirghaṭādeḥ sata eva vā
— दीप से ; — की जाती है ; — व्यक्ति ; — घट आदि की ; — जो पहले से सत् है उसी की ; — अथवा

(आक्षेप:) अथवा घट आदि की व्यक्ति दीप से की जाती है — किन्तु जो पहले से सत् है उसी की (दीप केवल प्रकट करता है, बनाता नहीं)।