मुञ्चतोऽपि निजां शक्तिं स्वातन्त्र्ये ज्ञानमापतेत् ॥६॥
muñcato'pi nijāṃ śaktiṃ svātantrye jñānamāpatet
अपनी निज शक्ति को छोड़ते हुए भी, स्वातन्त्र्य में (उसका) ज्ञान बना ही रहेगा (क्योंकि शक्ति और शक्तिमान् कभी वस्तुतः पृथक् नहीं होते)।
अपनी निज शक्ति को छोड़ते हुए भी, स्वातन्त्र्य में (उसका) ज्ञान बना ही रहेगा (क्योंकि शक्ति और शक्तिमान् कभी वस्तुतः पृथक् नहीं होते)।