पुरा शान्तस्वरूपत्वं पश्चात्तादृगवस्थितिः ।
शान्ते शिवत्वं स्थूलेऽपि शिवत्वं यत्र वर्णितम् ॥५५॥
purā śāntasvarūpatvaṃ paścāttādṛgavasthitiḥ |
śānte śivatvaṃ sthūle'pi śivatvaṃ yatra varṇitam
(आक्षेप:) पहले शान्त-स्वरूपत्व, बाद में वैसी (सक्रिय) अवस्था; (किन्तु) जहाँ शान्त में शिवत्व कहा गया है, वहाँ स्थूल में भी शिवत्व (कहा गया है)।