The Vision of Śiva· 2.86 / 90

The Vision of Śiva2.86

2.86
तस्या अपि सामरस्ये व्यवस्थावान् स्थितः शिवः । एवं भवप्रक्रियाया अपि सूक्ष्मतरा स्थितिः ॥८६॥
tasyā api sāmarasye vyavasthāvān sthitaḥ śivaḥ | evaṃ bhavaprakriyāyā api sūkṣmatarā sthitiḥ
— उस (इच्छा) के भी ; — सामरस्य में ; — व्यवस्थावान् (अपनी व्यवस्था से युक्त) ; — स्थित ; — शिव ; — इस प्रकार ; — भव (संसार) की प्रक्रिया से भी ; — सूक्ष्मतर ; — स्थिति

उस (इच्छा) के सामरस्य में भी शिव अपनी व्यवस्था से युक्त होकर स्थित है; इस प्रकार भव (संसार) की प्रक्रिया से भी सूक्ष्मतर (शिव की) स्थिति (पूर्व में) है।