तस्या अपि सामरस्ये व्यवस्थावान् स्थितः शिवः ।
एवं भवप्रक्रियाया अपि सूक्ष्मतरा स्थितिः ॥८६॥
tasyā api sāmarasye vyavasthāvān sthitaḥ śivaḥ |
evaṃ bhavaprakriyāyā api sūkṣmatarā sthitiḥ
उस (इच्छा) के सामरस्य में भी शिव अपनी व्यवस्था से युक्त होकर स्थित है; इस प्रकार भव (संसार) की प्रक्रिया से भी सूक्ष्मतर (शिव की) स्थिति (पूर्व में) है।