The Vision of Śiva· 2.76 / 90

The Vision of Śiva2.76

2.76
अत्रैव शब्दनित्यत्ववादिनो रूढतां गताः । अनादिनाथ तेनैव शब्दतत्त्वेन तुल्यता ॥७६॥
atraiva śabdanityatvavādino rūḍhatāṃ gatāḥ | anādinātha tenaiva śabdatattvena tulyatā
— यहीं ; — शब्द-नित्यत्व-वादी ; — रूढ़ता (दृढ़मूलता) को ; — प्राप्त हुए ; — अनादि के साथ ; — अब ; — उसी के साथ ; — शब्द-तत्त्व के साथ ; — तुल्यता

यहीं शब्द-नित्यत्व-वादी रूढ़ (दृढ़मूल) हो गए हैं; (वे दावा करते हैं कि) उसी अनादि शब्द-तत्त्व के साथ तुल्यता है (— किन्तु इसका अब खण्डन करते हैं)।