प्रमातृत्वेनाहम् इति विमर्शो ऽन्यव्यपोहनात्
विकल्प एव स परप्रतियोग्य् अवभासजः ॥५॥
pramātṛtvenāham iti vimarśo 'nyavyapohanāt
vikalpa eva sa parapratiyogy avabhāsajaḥ
— (सीमित) प्रमातृत्व रूप में; — 'मैं'; — इति — इस प्रकार; — विमर्श; — अन्य के व्यपोहन (बहिष्कार) के कारण; — विकल्प ही; — वह (विमर्श); — जिसका प्रतियोगी वह अन्य है; — आभास से उत्पन्न
— वह 'मैं (सीमित) प्रमाता हूँ' इस रूप का विमर्श, अन्य के व्यपोहन (बहिष्कार) के कारण, विकल्प ही है, जिसका प्रतियोगी वह अन्य है और जो आभास से उत्पन्न होता है।