Verses on the Recognition of the Lord· 12.17 / 21

Verses on the Recognition of the Lord12.17

12.17
परस्परस्वभावत्वे कार्यकारणयोर् अपि एकत्वम् एव भेदे हि नैवान्योन्यस्वरूपता ॥१७॥
parasparasvabhāvatve kāryakāraṇayor api ekatvam eva bhede hi naivānyonyasvarūpatā
— (यदि) परस्पर एक-दूसरे के स्वभाव वाले हों ; — कार्य और कारण के (द्विवचन) ; — भी ; — एकता ही (होगी) ; — (यदि) भेद हो ; — क्योंकि ; — नहीं (बनता) ; — परस्पर एक-दूसरे का स्वरूप होना

यदि कार्य और कारण परस्पर एक-दूसरे के स्वभाव वाले हों, तो (उनमें) एकता ही होगी; और यदि भेद हो, तो परस्पर एक-दूसरे का स्वरूप होना कभी नहीं (बनता)।