मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतसः ।
आसुरीं राक्षसीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः ॥
९-१३ ॥
moghāśā moghakarmāṇo moghajñānā vicetasaḥ |
āsurīṃ rākṣasīṃ caiva prakṛtiṃ mohinīṃ śritāḥ ||
9-13 ||
व्यर्थ आशा वाले, व्यर्थ कर्म वाले, व्यर्थ ज्ञान वाले विवेकहीन लोग आसुरी, राक्षसी और मोहिनी प्रकृति का आश्रय लेते हैं।