महात्मानस्तु मां पार्थ दैवीं प्रकृतिमाश्रिताः ।
भजन्त्यनन्यमनसो ज्ञात्वा भूतादिमव्ययम् ॥
९-१४ ॥
mahātmānastu māṃ pārtha daivīṃ prakṛtimāśritāḥ |
bhajantyananyamanaso jñātvā bhūtādimavyayam ||
9-14 ||
किन्तु हे पार्थ, दैवी प्रकृति का आश्रय लेने वाले महात्मा मुझे भूतों का अव्यय आदि-कारण जानकर अनन्य मन से भजते हैं।