Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.15 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.15

9.15
सततं कीर्तयन्तश्च यतन्तश्च यतव्रताः । नमस्यन्तश्च मां भक्त्या नित्ययुक्ता उपासते ॥ ९-१५ ॥
satataṃ kīrtayantaśca yatantaśca yatavratāḥ | namasyantaśca māṃ bhaktyā nityayuktā upāsate || 9-15 ||
— और निरन्तर कीर्तन करते हुए ; — और यत्न करते हुए, दृढ़व्रत ; — और भक्ति से मुझे नमस्कार करते हुए ; — नित्ययुक्त होकर उपासना करते हैं

और निरन्तर मेरा कीर्तन करते हुए, यत्न करते हुए, दृढ़व्रत रहकर, और भक्ति से मुझे नमस्कार करते हुए, नित्ययुक्त होकर मेरी उपासना करते हैं।