Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.12
अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमास्थितम् ।
परं भावमजानन्तो ममाव्ययमनुत्तमम् ॥
९-१२ ॥
avajānanti māṃ mūḍhā mānuṣīṃ tanumāsthitam |
paraṃ bhāvamajānanto mamāvyayamanuttamam ||
9-12 ||
— मूढ़ लोग मेरी अवज्ञा करते हैं ; — मनुष्य-रूप में स्थित को ; — मेरे परम भाव को न जानते हुए ; — मेरे अव्यय, अनुत्तम को मनुष्य-रूप में स्थित मुझ की मूढ़ लोग अवज्ञा करते हैं, मेरे परम भाव को न जानते हुए, जो अव्यय और अनुत्तम है।