Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 8.26 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)8.26

8.26
शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते । अनयोर्यात्यनावृत्तिमाद्ययावर्ततेऽन्यया ॥ ८-२६ ॥
śuklakṛṣṇe gatī hyete jagataḥ śāśvate mate | anayoryātyanāvṛttimādyayāvartate'nyayā || 8-26 ||
— ये शुक्ल-कृष्ण दोनों गतियाँ ; — जगत् की शाश्वत मानी गईं ; — इनमें से एक से अनावृत्ति को जाता है ; — पहली से; दूसरी से लौटता है

ये शुक्ल और कृष्ण दोनों गतियाँ जगत् की शाश्वत मानी गई हैं; इनमें से एक से मनुष्य अनावृत्ति को जाता है और दूसरी से लौट आता है।