सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि ।
ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः ॥
६-३० ॥
sarvabhūtasthamātmānaṃ sarvabhūtāni cātmani |
īkṣate yogayuktātmā sarvatra samadarśanaḥ ||
6-30 ||
योगयुक्त आत्मा वाला, सर्वत्र समदर्शी पुरुष आत्मा को समस्त भूतों में स्थित और समस्त भूतों को आत्मा में देखता है।