Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.30 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.30

6.30
सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि । ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः ॥ ६-३० ॥
sarvabhūtasthamātmānaṃ sarvabhūtāni cātmani | īkṣate yogayuktātmā sarvatra samadarśanaḥ || 6-30 ||
— समस्त भूतों में स्थित आत्मा को ; — और समस्त भूतों को आत्मा में ; — देखता है योगयुक्त आत्मा ; — सर्वत्र समदर्शी

योगयुक्त आत्मा वाला, सर्वत्र समदर्शी पुरुष आत्मा को समस्त भूतों में स्थित और समस्त भूतों को आत्मा में देखता है।