Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 4.19 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)4.19

4.19
यस्य सर्वे समारम्भाः कामसङ्कल्पवर्जिताः । ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पण्डितं बुधाः ॥ ४-१९ ॥
yasya sarve samārambhāḥ kāmasaṅkalpavarjitāḥ | jñānāgnidagdhakarmāṇaṃ tamāhuḥ paṇḍitaṃ budhāḥ || 4-19 ||
— जिसके समस्त आरम्भ ; — कामना और संकल्प से रहित ; — जिसके कर्म ज्ञानाग्नि से भस्म ; — उसे ज्ञानीजन पण्डित कहते हैं

जिसके समस्त आरम्भ कामना और संकल्प से रहित हैं, और जिसके कर्म ज्ञान-रूपी अग्नि से भस्म हो गए हैं, उसे ज्ञानीजन पण्डित कहते हैं।