Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.23 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.23

3.23
उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम् । सङ्करस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः ॥ ३-२३ ॥
utsīdeyurime lokā na kuryāṃ karma cedaham | saṅkarasya ca kartā syāmupahanyāmimāḥ prajāḥ || 3-23 ||
— ये समस्त लोक नष्ट हो जाएँ ; — यदि मैं कर्म न करूँ ; — और मैं संकर का कर्ता बनूँ ; — इन प्रजाओं का विनाश करूँ

यदि मैं कर्म न करूँ तो ये समस्त लोक नष्ट हो जाएँ; और मैं संकर का कर्ता बनूँ तथा इन प्रजाओं का विनाश करूँ।