Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.22 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.22

3.22
यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः । मम वर्त्मानुवर्तेरन्मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥ ३-२२ ॥
yadi hyahaṃ na varteyaṃ jātu karmaṇyatandritaḥ | mama vartmānuvarteranmanuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥ || 3-22 ||
— क्योंकि यदि मैं प्रवृत्त न रहूँ ; — कभी कर्म में आलस्यरहित ; — तो मेरे मार्ग का अनुसरण करेंगे ; — मनुष्य सब प्रकार से, हे पार्थ

क्योंकि यदि मैं आलस्यरहित होकर कर्म में प्रवृत्त न रहूँ, तो हे पार्थ, मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करेंगे।