Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.24 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.24

3.24
तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर । असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः ॥ ३-२४ ॥
tasmādasaktaḥ satataṃ kāryaṃ karma samācara | asakto hyācarankarma paramāpnoti pūruṣaḥ || 3-24 ||
— अतः अनासक्त होकर सदा ; — करने योग्य कर्म का सम्यक् आचरण कर ; — क्योंकि अनासक्त होकर कर्म करता हुआ ; — पुरुष परम पद को प्राप्त करता है

अतः अनासक्त होकर सदा करने योग्य कर्म का सम्यक् आचरण करो; क्योंकि अनासक्त होकर कर्म करने वाला पुरुष परम पद को प्राप्त करता है।