Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.12 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.12

3.12
इष्टान्कामान्हि वो देवा दास्यन्ते यज्ञभाविताः । तैर्दत्तानप्रदायैभ्यो यो भुङ्क्ते स्तेन एव सः ॥ ३-१२ ॥
iṣṭānkāmānhi vo devā dāsyante yajñabhāvitāḥ | tairdattānapradāyaibhyo yo bhuṅkte stena eva saḥ || 3-12 ||
— क्योंकि देवता तुम्हें इष्ट भोग देंगे ; — यज्ञ से पुष्ट होकर ; — उनके दिए को उन्हें अर्पित किए बिना ; — जो भोगता है वह चोर ही है

क्योंकि यज्ञ से पुष्ट देवता तुम्हें इष्ट भोग प्रदान करेंगे; उनके दिए हुए भोगों को उन्हें अर्पित किए बिना जो भोगता है, वह चोर ही है।