Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.11 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.11

3.11
देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः । परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ ॥ ३-११ ॥
devānbhāvayatānena te devā bhāvayantu vaḥ | parasparaṃ bhāvayantaḥ śreyaḥ paramavāpsyatha || 3-11 ||
— इस यज्ञ से देवताओं को पुष्ट करो ; — वे देवता तुम्हें पुष्ट करें ; — परस्पर एक-दूसरे को पुष्ट करते हुए ; — तुम परम श्रेय को प्राप्त करोगे

इस यज्ञ से तुम देवताओं को पुष्ट करो और वे देवता तुम्हें पुष्ट करें; इस प्रकार परस्पर एक-दूसरे को पुष्ट करते हुए तुम परम श्रेय को प्राप्त करोगे।