Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.13 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.13

3.13
यज्ञशिष्टाशिनः सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषैः । भुञ्जते ते त्वघं पापा ये पचन्त्यात्मकारणात् ॥ ३-१३ ॥
yajñaśiṣṭāśinaḥ santo mucyante sarvakilbiṣaiḥ | bhuñjate te tvaghaṃ pāpā ye pacantyātmakāraṇāt || 3-13 ||
— यज्ञ के अवशेष खाने वाले सत्पुरुष ; — समस्त पापों से मुक्त हो जाते हैं ; — किन्तु पापी पाप ही खाते हैं ; — जो केवल अपने लिए पकाते हैं

यज्ञ के अवशेष को खाने वाले सत्पुरुष समस्त पापों से मुक्त हो जाते हैं; किन्तु जो पापी केवल अपने लिए ही पकाते हैं, वे पाप ही खाते हैं।