यज्ञशिष्टाशिनः सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषैः ।
भुञ्जते ते त्वघं पापा ये पचन्त्यात्मकारणात् ॥
३-१३ ॥
yajñaśiṣṭāśinaḥ santo mucyante sarvakilbiṣaiḥ |
bhuñjate te tvaghaṃ pāpā ye pacantyātmakāraṇāt ||
3-13 ||
यज्ञ के अवशेष को खाने वाले सत्पुरुष समस्त पापों से मुक्त हो जाते हैं; किन्तु जो पापी केवल अपने लिए ही पकाते हैं, वे पाप ही खाते हैं।