Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.14 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.14

3.14
अन्नाद् भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवः । यज्ञाद् भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः ॥ ३-१४ ॥
annād bhavanti bhūtāni parjanyādannasambhavaḥ | yajñād bhavati parjanyo yajñaḥ karmasamudbhavaḥ || 3-14 ||
— अन्न से प्राणी उत्पन्न होते हैं ; — वर्षा से अन्न की उत्पत्ति ; — यज्ञ से वर्षा होती है ; — यज्ञ कर्म से उत्पन्न होता है

अन्न से प्राणी उत्पन्न होते हैं, वर्षा से अन्न की उत्पत्ति होती है, यज्ञ से वर्षा होती है, और यज्ञ कर्म से उत्पन्न होता है।