या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी ।
यस्यां जाग्रति भूतानि सा रात्रिः पश्यतो मुनेः ॥
२-७१ ॥
yā niśā sarvabhūtānāṃ tasyāṃ jāgarti saṃyamī |
yasyāṃ jāgrati bhūtāni sā rātriḥ paśyato muneḥ ||
2-71 ||
जो समस्त भूतों के लिए रात्रि है, उसमें संयमी जागता है; और जिसमें भूत जागते हैं, वह देखने वाले मुनि के लिए रात्रि है।