Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.71 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.71

2.71
या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी । यस्यां जाग्रति भूतानि सा रात्रिः पश्यतो मुनेः ॥ २-७१ ॥
yā niśā sarvabhūtānāṃ tasyāṃ jāgarti saṃyamī | yasyāṃ jāgrati bhūtāni sā rātriḥ paśyato muneḥ || 2-71 ||
— जो समस्त भूतों के लिए रात्रि है ; — उसमें संयमी जागता है ; — जिसमें भूत जागते हैं ; — वह देखने वाले मुनि के लिए रात्रि है

जो समस्त भूतों के लिए रात्रि है, उसमें संयमी जागता है; और जिसमें भूत जागते हैं, वह देखने वाले मुनि के लिए रात्रि है।