Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.70 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.70

2.70
तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः । इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥ २-७० ॥
tasmādyasya mahābāho nigṛhītāni sarvaśaḥ | indriyāṇīndriyārthebhyastasya prajñā pratiṣṭhitā || 2-70 ||
— अतः, हे महाबाहु, जिसकी ; — सब ओर से निगृहीत हैं ; — इन्द्रियाँ अपने विषयों से ; — उसकी बुद्धि प्रतिष्ठित है

अतः हे महाबाहु, जिसकी इन्द्रियाँ अपने विषयों से सब ओर से निगृहीत हैं, उसकी बुद्धि प्रतिष्ठित है।