Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.21 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.21

2.21
न जायते म्रियते वा कदाचि- न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः । अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे ॥ २-२१ ॥
na jāyate mriyate vā kadāci- nnāyaṃ bhūtvā bhavitā vā na bhūyaḥ | ajo nityaḥ śāśvato'yaṃ purāṇo na hanyate hanyamāne śarīre || 2-21 ||
— यह न कभी जन्म लेता है, न मरता है ; — न यह होकर फिर अनहोना होगा ; — अज, नित्य, शाश्वत, पुरातन यह ; — शरीर के मारे जाने पर भी नहीं मारा जाता

यह न कभी जन्म लेता है, न मरता है; न यह होकर फिर अनहोना होगा; यह अज, नित्य, शाश्वत और पुरातन है, शरीर के मारे जाने पर भी मारा नहीं जाता।