Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.61 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.61

18.61
ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्येष वसतेऽर्जुन । भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया ॥ १८-६१ ॥
īśvaraḥ sarvabhūtānāṃ hṛdyeṣa vasate'rjuna | bhrāmayansarvabhūtāni yantrārūḍhāni māyayā || 18-61 ||
— समस्त भूतों का ईश्वर ; — हृदय में निवास करता है, हे अर्जुन ; — समस्त भूतों को घुमाता हुआ ; — यन्त्र पर आरूढ़, माया से

हे अर्जुन, ईश्वर समस्त भूतों के हृदय में निवास करता है, और समस्त भूतों को, मानो यन्त्र पर आरूढ़, अपनी माया से घुमाता है।