ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्येष वसतेऽर्जुन ।
भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया ॥
१८-६१ ॥
īśvaraḥ sarvabhūtānāṃ hṛdyeṣa vasate'rjuna |
bhrāmayansarvabhūtāni yantrārūḍhāni māyayā ||
18-61 ||
हे अर्जुन, ईश्वर समस्त भूतों के हृदय में निवास करता है, और समस्त भूतों को, मानो यन्त्र पर आरूढ़, अपनी माया से घुमाता है।