Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.60 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.60

18.60
स्वभावजेन कौन्तेय निबद्धः स्वेन कर्मणा । कर्तुं नेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत् ॥ १८-६० ॥
svabhāvajena kaunteya nibaddhaḥ svena karmaṇā | kartuṃ necchasi yanmohātkariṣyasyavaśo'pi tat || 18-60 ||
— अपने स्वभावजनित से, हे कुन्तीपुत्र ; — अपने कर्म से बँधा हुआ ; — जो मोह से करना नहीं चाहता ; — उसे विवश होकर भी करेगा

हे कुन्तीपुत्र, अपने स्वभावजनित कर्म से बँधा हुआ तू, जो मोह से करना नहीं चाहता, उसे विवश होकर भी करेगा।