Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.59 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.59

18.59
यदहङ्कारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे । मिथ्यैप व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति ॥ १८-५९ ॥
yadahaṅkāramāśritya na yotsya iti manyase | mithyaipa vyavasāyaste prakṛtistvāṃ niyokṣyati || 18-59 ||
— यदि अहंकार का आश्रय लेकर ; — 'मैं युद्ध नहीं करूँगा' ऐसा मानता है ; — मिथ्या है तेरा यह निश्चय ; — प्रकृति तुझे नियुक्त कर देगी

यदि अहंकार का आश्रय लेकर तू 'मैं युद्ध नहीं करूँगा' ऐसा मानता है, तो तेरा यह निश्चय मिथ्या है; तेरी प्रकृति तुझे (युद्ध में) नियुक्त कर देगी।