Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.62 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.62

18.62
तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत । तत्प्रसादात्परां सिदिं स्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतम् ॥ १८-६२ ॥
tameva śaraṇaṃ gaccha sarvabhāvena bhārata | tatprasādātparāṃ sidiṃ sthānaṃ prāpsyasi śāśvatam || 18-62 ||
— उसी की शरण में जा ; — सम्पूर्ण भाव से, हे भारत ; — उसकी कृपा से परम शान्ति ; — और शाश्वत स्थान को पाएगा

हे भारत, सम्पूर्ण भाव से उसी की शरण में जा; उसकी कृपा से तू परम शान्ति और शाश्वत स्थान को प्राप्त करेगा।