Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.63 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.63

18.63
इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया । विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु ॥ १८-६३ ॥
iti te jñānamākhyātaṃ guhyādguhyataraṃ mayā | vimṛśyaitadaśeṣeṇa yathecchasi tathā kuru || 18-63 ||
— इस प्रकार तुझसे ज्ञान कहा गया ; — गुह्य से भी गुह्यतर मेरे द्वारा ; — इसका पूर्णतः विचार करके ; — जैसा तू चाहता है वैसा कर

इस प्रकार गुह्य से भी गुह्यतर यह ज्ञान मैंने तुझसे कहा; इसका पूर्णतः विचार करके जैसा तू चाहता है वैसा कर।