Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.11 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.11

18.11
नहि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः । यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते ॥ १८-११ ॥
nahi dehabhṛtā śakyaṃ tyaktuṃ karmāṇyaśeṣataḥ | yastu karmaphalatyāgī sa tyāgītyabhidhīyate || 18-11 ||
— क्योंकि देहधारी के लिए सम्भव नहीं ; — कर्मों को पूर्णतः त्यागना ; — किन्तु जो कर्मफल का त्यागी ; — वही त्यागी कहलाता है

क्योंकि देहधारी के लिए समस्त कर्मों को पूर्णतः त्यागना सम्भव नहीं; किन्तु जो कर्मफल का त्यागी है, वही त्यागी कहलाता है।