Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 15.4 / 20

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)15.4

15.4
ततः पदं तत्परिमार्गितव्यं यस्मिन्गतो न निवर्तेत भूयः । तमेव चाद्यं पुरुषं प्रपद्ये- द्यतः प्रवृत्तिः प्रसृता पुराणी ॥ १५-४ ॥
tataḥ padaṃ tatparimārgitavyaṃ yasmingato na nivarteta bhūyaḥ | tameva cādyaṃ puruṣaṃ prapadye- dyataḥ pravṛttiḥ prasṛtā purāṇī || 15-4 ||
— इसके पश्चात् उस पद को खोजना चाहिए ; — जिसमें पहुँचकर फिर लौटता नहीं ; — और उसी आद्य पुरुष की शरण लेनी चाहिए ; — जिससे यह पुरातन प्रवृत्ति प्रसृत हुई

— इसके पश्चात् उस पद को खोजना चाहिए, जिसमें पहुँचकर मनुष्य फिर लौटता नहीं; और उसी आद्य पुरुष की शरण लेनी चाहिए, जिससे यह पुरातन प्रवृत्ति प्रसृत हुई है।