ततः पदं तत्परिमार्गितव्यं यस्मिन्गतो न निवर्तेत भूयः ।
तमेव चाद्यं पुरुषं प्रपद्ये- द्यतः प्रवृत्तिः प्रसृता पुराणी ॥
१५-४ ॥
tataḥ padaṃ tatparimārgitavyaṃ yasmingato na nivarteta bhūyaḥ |
tameva cādyaṃ puruṣaṃ prapadye- dyataḥ pravṛttiḥ prasṛtā purāṇī ||
15-4 ||
— इसके पश्चात् उस पद को खोजना चाहिए, जिसमें पहुँचकर मनुष्य फिर लौटता नहीं; और उसी आद्य पुरुष की शरण लेनी चाहिए, जिससे यह पुरातन प्रवृत्ति प्रसृत हुई है।