उदासीनवदासीनो गुणैर्यो न विचाल्यते ।
गुणा वर्तन्ते इत्येव योऽज्ञस्तिष्ठति नेङ्गते ॥
१४-२३ ॥
udāsīnavadāsīno guṇairyo na vicālyate |
guṇā vartante ityeva yo'jñastiṣṭhati neṅgate ||
14-23 ||
जो उदासीन के समान स्थित होकर गुणों से विचलित नहीं होता, जो 'गुण ही बरत रहे हैं' ऐसा (जानकर) स्थिर रहता है और हिलता नहीं;