Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 14.23 / 27

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)14.23

14.23
उदासीनवदासीनो गुणैर्यो न विचाल्यते । गुणा वर्तन्ते इत्येव योऽज्ञस्तिष्ठति नेङ्गते ॥ १४-२३ ॥
udāsīnavadāsīno guṇairyo na vicālyate | guṇā vartante ityeva yo'jñastiṣṭhati neṅgate || 14-23 ||
— उदासीन के समान स्थित ; — जो गुणों से विचलित नहीं होता ; — 'गुण ही बरतते हैं' ऐसा जो ; — स्थिर रहता है, हिलता नहीं

जो उदासीन के समान स्थित होकर गुणों से विचलित नहीं होता, जो 'गुण ही बरत रहे हैं' ऐसा (जानकर) स्थिर रहता है और हिलता नहीं;