प्रकाशं च प्रवृत्तिं च मोहमेव च पाण्डव ।
न द्वेष्टि सम्प्रवृत्तानि न निवृत्तानि काङ्क्षति ॥
१४-२२ ॥
prakāśaṃ ca pravṛttiṃ ca mohameva ca pāṇḍava |
na dveṣṭi sampravṛttāni na nivṛttāni kāṅkṣati ||
14-22 ||
हे पाण्डव, प्रकाश (सत्त्व), प्रवृत्ति (रजस्) और मोह (तमस्) को — वह न इनके आ जाने पर द्वेष करता है, न इनके निवृत्त हो जाने पर इनकी कामना करता है।