कार्यकरणकर्तृत्वे हेतुः प्रकृतिरुच्यते ।
पुरुषः सुखदुःखानां भोक्तृत्वे हेतुरुच्यते ॥
१३-२१ ॥
kāryakaraṇakartṛtve hetuḥ prakṛtirucyate |
puruṣaḥ sukhaduḥkhānāṃ bhoktṛtve heturucyate ||
13-21 ||
कार्य और करण के कर्तृत्व में प्रकृति हेतु कही जाती है; सुख और दुःख के भोक्तृत्व में पुरुष हेतु कहा जाता है।