पुरुषः प्रकृतिस्थो हि भुङ्क्ते प्रकृतिजान्गुणान् ।
कारणं गुणसङ्गोऽस्य सदसद्योनिजन्मसु ॥
१३-२२ ॥
puruṣaḥ prakṛtistho hi bhuṅkte prakṛtijānguṇān |
kāraṇaṃ guṇasaṅgo'sya sadasadyonijanmasu ||
13-22 ||
क्योंकि प्रकृति में स्थित पुरुष प्रकृति से उत्पन्न गुणों को भोगता है; गुणों में उसकी आसक्ति ही उसके अच्छे और बुरे योनियों में जन्म का कारण है।