Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 13.22 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)13.22

13.22
पुरुषः प्रकृतिस्थो हि भुङ्क्ते प्रकृतिजान्गुणान् । कारणं गुणसङ्गोऽस्य सदसद्योनिजन्मसु ॥ १३-२२ ॥
puruṣaḥ prakṛtistho hi bhuṅkte prakṛtijānguṇān | kāraṇaṃ guṇasaṅgo'sya sadasadyonijanmasu || 13-22 ||
— क्योंकि प्रकृति में स्थित पुरुष ; — प्रकृतिजनित गुणों को भोगता है ; — गुणों में उसकी आसक्ति कारण है ; — अच्छे-बुरे योनियों में जन्म का

क्योंकि प्रकृति में स्थित पुरुष प्रकृति से उत्पन्न गुणों को भोगता है; गुणों में उसकी आसक्ति ही उसके अच्छे और बुरे योनियों में जन्म का कारण है।